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छपरा में भीषण सड़क हादसा, ट्रक और सीएनजी टेंपो की टक्कर में तीन की मौत; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

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सारण जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र में एनएच-531 पर ट्रक और सीएनजी टेंपो की भीषण टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जबकि इलाज में देरी को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

सारण/आलम की खबर:सारण जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार की सुबह हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। छपरा-सीवान मुख्य मार्ग स्थित एनएच-531 पर बनवार ढाला और पूरब सोनिया पुल के समीप तेज रफ्तार ट्रक और सीएनजी टेंपो की आमने-सामने की टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद सड़क पर चीख-पुकार मच गई और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा सुबह करीब पांच बजे हुआ, जब एक सीएनजी टेंपो छपरा की ओर जा रहा था। इसी दौरान सामने से तेज रफ्तार में आ रहे ट्रक ने टेंपो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोग दूर जाकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि टक्कर की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी, जिसके बाद लोग घरों से निकलकर घटनास्थल की ओर दौड़े।

स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को बचाने की कोशिश शुरू की और पुलिस को सूचना दी। थोड़ी ही देर में दाउदपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से घायलों को बाहर निकाला और इलाज के लिए एकमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। लेकिन इसके बाद जो स्थिति सामने आई, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंभीर रूप से घायल एक युवक काफी देर तक डायल 112 वाहन में ही तड़पता रहा, लेकिन अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिल सका। लोगों का कहना है कि घायल युवक दर्द से कराहता रहा, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से तत्काल इलाज शुरू नहीं किया गया। इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाता तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी। कई लोगों ने आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में आज भी आपातकालीन व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। हादसे के बाद अस्पताल में मौजूद लोगों ने व्यवस्था के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की।

घटना के दौरान डायल 112 वाहन के चालक का गुस्सा भी सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक चालक ने मौके पर स्वास्थ्य व्यवस्था और सिस्टम की कार्यशैली को लेकर नाराजगी व्यक्त की। बताया जा रहा है कि घटनास्थल और अस्पताल परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने इसका वीडियो भी बनाया, जो अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार हादसे में मृत तीन लोगों की पहचान कराने की कोशिश की जा रही है। समाचार लिखे जाने तक कुछ शवों की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस आसपास के थानों और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से मृतकों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है। वहीं गंभीर रूप से घायल दो अन्य लोगों का इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

हादसे के बाद कुछ समय तक एनएच-531 पर यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। दुर्घटनाग्रस्त टेंपो सड़क के बीचोंबीच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में पड़ा था, जबकि ट्रक भी सड़क किनारे पलटने जैसी स्थिति में पहुंच गया था। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों वाहनों को हटवाया, जिसके बाद धीरे-धीरे आवागमन सामान्य हो सका।

स्थानीय लोगों का कहना है कि छपरा-सीवान मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस सड़क पर आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि कई जगहों पर स्पीड कंट्रोल की व्यवस्था नहीं है और भारी वाहन बेलगाम रफ्तार से गुजरते हैं, जिससे हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है।

ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि एनएच-531 पर नियमित वाहन जांच, स्पीड मॉनिटरिंग और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाने की भी मांग उठ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सड़क हादसों की बड़ी वजह तेज रफ्तार, लापरवाही और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की कमी है। कई मामलों में हादसे के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की जान चली जाती है। यही वजह है कि सड़क सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।

इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जमीनी स्तर पर कितनी तैयारी है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को केवल कागजी दावों तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक सुधार की दिशा में काम करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक और सीएनजी टेंपो को कब्जे में लेकर तकनीकी जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसे के समय ट्रक की रफ्तार कितनी थी और चालक की क्या भूमिका रही। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कुल मिलाकर दाउदपुर में हुआ यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल छोड़ गया है। हादसे के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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